सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 2026: आस्था, शौर्य और सभ्यतागत गौरव के 1000 वर्ष

Sun 11-Jan-2026,12:26 AM IST +05:30

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सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 2026: आस्था, शौर्य और सभ्यतागत गौरव के 1000 वर्ष सोमनाथ-स्वाभिमान-पर्व-2026
  • सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 2026 में 1000 वर्षों की आस्था, पुनरुद्धार और राष्ट्रीय गौरव का उत्सव, पीएम मोदी की विशेष सहभागिता के साथ।

Gujarat / Gir Somnath :

सोमनाथ/ गुजरात के प्रभास पाटन स्थित सोमनाथ में 8 से 11 जनवरी 2026 तक आयोजित होने वाला ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले अभिलिखित आक्रमण के एक हजार वर्ष पूरे होने के स्मरण में मनाया जा रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित संत, श्रद्धालु और देशभर के नागरिक सहभागिता करेंगे। यह पर्व भारत की सभ्यतागत जीवटता, अटूट आस्था और सांस्कृतिक आत्मसम्मान को स्मरण करने का प्रतीक है। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना, ऐतिहासिक स्मृति और सामूहिक गौरव की सशक्त अभिव्यक्ति बनकर उभरता है।

स्वाभिमान पर्व: इतिहास नहीं, आत्मबल का उत्सव

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व को विनाश के शोक के रूप में नहीं, बल्कि सभ्यता की अविच्छिन्न धारा के उत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। जनवरी 1026 में हुए पहले अभिलिखित आक्रमण के एक सहस्राब्दी पूर्ण होने पर यह आयोजन भारत की उस चेतना को स्मरण करता है, जिसने हर बार टूटकर भी स्वयं को फिर से खड़ा किया।

चार दिवसीय इस पर्व में आध्यात्मिक साधना, सांस्कृतिक विमर्श और राष्ट्रीय स्मरण एक साथ प्रवाहित हो रहे हैं। 72 घंटे का अखंड ओंकार जाप, भक्ति संगीत, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और विचार गोष्ठियाँ इस बात का संकेत हैं कि सोमनाथ केवल अतीत नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की भी प्रेरणा है।

सभ्यतागत निरंतरता का केंद्र: सोमनाथ

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में प्रथम स्थान पर प्रतिष्ठित सोमनाथ, भारत के आध्यात्मिक भूगोल की धुरी है। अरब सागर के तट पर स्थित यह मंदिर सदियों से आस्था का प्रकाशस्तंभ रहा है। यहाँ की परंपरा केवल पूजा तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन का विस्तार है।

सोमनाथ की कथा बताती है कि मंदिर पत्थरों से नहीं, बल्कि विश्वास से बनते हैं। बार-बार ध्वस्त होने के बावजूद इसका पुनर्निर्माण हर पीढ़ी के संकल्प का प्रमाण रहा है। यह विश्व इतिहास में दुर्लभ उदाहरण है, जहाँ आस्था ने समय और सत्ता दोनों को परास्त किया।

आक्रमण और पुनरुद्धार: जीवटता की सहस्राब्दी

1026 के आक्रमण से शुरू होकर सदियों तक चले विध्वंस और पुनर्निर्माण के चक्र ने सोमनाथ को एक साधारण धार्मिक स्थल से कहीं ऊपर उठा दिया। यह मंदिर भारतीय समाज की सामूहिक स्मृति में जीवित रहा।

आधुनिक भारत में, सरदार वल्लभभाई पटेल ने 1947 के बाद इसके पुनर्निर्माण को राष्ट्रीय स्वाभिमान से जोड़ा। 11 मई 1951 को पुनः प्राण-प्रतिष्ठा केवल धार्मिक घटना नहीं थी, बल्कि स्वतंत्र भारत की सांस्कृतिक पुनर्स्थापना का क्षण था। 2026 में इस ऐतिहासिक क्षण के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं, जो स्वाभिमान पर्व को और अधिक अर्थपूर्ण बनाते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका और सहभागिता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो श्री सोमनाथ ट्रस्ट के प्रमुख भी हैं, इस पर्व को राष्ट्रीय चेतना से जोड़ रहे हैं। 10–11 जनवरी 2026 को उनकी यात्रा इस आयोजन को विशेष महत्व देती है। वे अखंड ओंकार जाप, भव्य ड्रोन शो और शौर्य यात्रा में भाग लेंगे। 11 जनवरी को मंदिर में पूजा-अर्चना और जनसभा के माध्यम से वे सोमनाथ के सभ्यतागत संदेश, विश्वास, एकता और आत्मसम्मान को राष्ट्र के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।

भव्यता और जीवंत विरासत

150 फुट ऊँचे शिखर वाला सोमनाथ मंदिर स्थापत्य, श्रद्धा और शिल्प का अद्वितीय संगम है। 1,666 स्वर्ण-मंडित कलश और 14,200 ध्वजाएँ इसे एक जीवंत तीर्थ बनाती हैं। हर वर्ष 92 से 97 लाख श्रद्धालु यहाँ आते हैं, जो इसकी सतत प्रासंगिकता को दर्शाता है। प्रकाश एवं ध्वनि शो, वंदे सोमनाथ कला महोत्सव और सांस्कृतिक पहलें नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ रही हैं।

महिला सशक्तिकरण और संवहनीयता का मॉडल

सोमनाथ मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का उदाहरण भी है। मंदिर न्यास में 363 महिलाएँ कार्यरत हैं, जो प्रसाद वितरण, भोजन सेवा और बिल्व वन प्रबंधन जैसी जिम्मेदारियाँ संभालती हैं।

पर्यावरणीय दृष्टि से भी सोमनाथ अग्रणी है, वर्मीकम्पोस्ट, वर्षा जल संचयन, मियावाकी वन और प्लास्टिक पुनर्चक्रण जैसे प्रयास इसे एक संवहनीय तीर्थ बनाते हैं। यह दर्शाता है कि परंपरा और आधुनिकता साथ-साथ चल सकती हैं।

शौर्य यात्रा और आध्यात्मिक पदयात्रा

स्वाभिमान पर्व से पूर्व आयोजित पदयात्राएँ और शौर्य यात्रा उस साहस की प्रतीक हैं, जिसने सदियों तक सोमनाथ की रक्षा की। संतों, ढोल-नगाड़ों और भक्ति जयकारों से गूंजता परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व भारत के सभ्यतागत आत्मविश्वास की घोषणा है। यह संदेश देता है कि सत्य, आस्था और आत्मसम्मान समय से परे हैं। सौराष्ट्र के तट पर खड़ा सोमनाथ आज भी यही कहता है, विनाश क्षणिक है, विश्वास शाश्वत।